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मंगलवार, 22 जुलाई 2008

रेल में छानानना छानानना होए रे।

यह गीत हम सब बच्चों के थिएटर वर्कशौप में सिखाते हैं। बच्चे बड़े मजे ले कर इसे गाते हैं और इस पर नाचते हैं। आपका मन करे तो रुकियेगा मत।

रेल में छानानना छानानना होए रे।
रेल में बैठे दो मारवाडी
रेल में अट्ठे -कट्ठे अट्ठे- कट्ठे होए रे।
रेल में छानानना छानानना होए रे।
रेल में बैठे दो मद्रासी
रेल में इडली- साम्भर, वडा साम्भर होए रे
रेल में छानानना छानानना होए रे।
रेल में बैठे दो पंजाबी
रेल में बल्ले-बल्ले, बल्ले-बल्ले होए रे
रेल में छानानना छानानना होए रे।
रेल में बैठे दो गुजराती
रेल में खमण ढोकला, खमण खाखडा होए रे
रेल में छानानना छानानना होए रे।
रेल में बैठे दो बिहारी
रेल में पूरी भुजिया, लड्डू-पेरा होए रे
रेल में छानानना छानानना होए रे।
रेल में बैठे दो छोटे बच्चे
रल में हल्ला -गुल्ला, हल्ला-गुला होए रे।
रेल में छानानना छानानना होए रे।

3 टिप्‍पणियां:

ओमप्रकाश तिवारी ने कहा…

आद.विभा जी नमस्ते ।
बच्चों की यह कविता पढ़कर अच्छा लगा । लेकिन आपने इस कविता में महाराष्ट्र और यू.पी. को क्यों छोड़ दिया ?
- ओमप्रकाश तिवारी

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बेहतरीन..पढ़कर अच्छा लगा.

राज भाटिय़ा ने कहा…

विभा जी, मुझे तो लग रहा हे जेसे कविता के साथ साथ मे रेल मे बेठा हु, बहुत सुन्दर, धन्यवाद