Tuesday, May 18, 2010

अम्मा ज़रा देख तो ऊपर,

इस बार कुछ कवितायें प्रतिमा की यादों से. प्रतिमा युवा प्रतिभा की प्रतिमा हैं. बनारस में रहती हैं और बहुत सी गतिविधियों से जुडी हुई हैं. दाना-पानी की तसल्ली के अलावा मानसिक खुराक की जबर्दस्त तैयारी करके रखती हैं. मेरे आग्रह पर उन्होंने यह कविता भेजी है. सारी बातें अब उन्हीं की कलम से. और हां, अपनी यादों के झरोखे से आप भी एकाध कविता चुरा लाइये ना!  आज के नौनिहालों के लिए. भेजें- gonujha.jha@gmail.com पर:

छुटपन की गठरी में तो जाने कैसी -कैसी अल्लम -गल्लम चीजें भरी हैं . गाँठ ढीली पड़ते ही चारों ओर बिखर जातीं हैं . लगता है कि बचपन तो बस कल ही विदा हुआ है , वो भी फिर - फिर लौटने का वादा करके .... ! बचपन में पाठ्य पुस्तक में पड़ी कविताएँ, याद नहीं पड़ता, कि कभी सायास रटी गयीं थी , लेकिन बस यूहीं जाने कब मन की सतह पर ऐसी छपीं कि फिर कभी भूलीं ही नहीं . ये ऐसी ही एक कविता है जो अब भी जबानी याद है . (शायद अपने भी कहीं पढ़ी हो , मेरे कोर्स में थी.)नहीं पता कि ये रचना किस कवि की है मगर उन्हें प्रणाम ज़रूर करना चाहूगीं कि उन्होंने मेरे बचपन को एक ऐसी कविता दी जो आज भी बारिश होते ही मुझे अपने बचपन में उड़ा ले जाती है.

अम्मा ज़रा देख तो ऊपर,

चले आ रहे हैं बादल,

गरज रहें हैं ,बरस रहें हैं
,दीख रहा है जल ही जल ,
हवा चल रही क्या पुरवाई ,
झूम रही डाली -डाली ,
ऊपर काली घटा घिरी है ,
नीचे फैली हरियाली ,
भीग रहे हैं खेत-बाग-वन,
भीग रहा है घर-आँगन ,
बाहर निकालूँ ,मैं भी भीगूँ ,
चाह रहा है मेरा मन !

7 comments:

दिलीप said...

badi hi sundar aur bholi kavita

उम्मेद गोठवाल said...

बाल मन की छाटी सी चाहत की सुन्दर सरस अभिव्यक्ति आपकी कविता में हुई है.......सुन्दर रचना........आज की भागदौङ में खो गये बचपन की स्मृति ताजा करने के लिए साधुवाद..........कृपया मेरे ब्लॉग से जुङेगे तो खुशी होगी।

उम्मेद गोठवाल said...

बाल मन की छाटी सी चाहत की सुन्दर सरस अभिव्यक्ति आपकी कविता में हुई है.......सुन्दर रचना........आज की भागदौङ में खो गये बचपन की स्मृति ताजा करने के लिए साधुवाद..........कृपया मेरे ब्लॉग से जुङेगे तो खुशी होगी।

Vibha Rani said...

उम्मेद जी, आपके ब्लॉग से जुडकर खुशी होगी. लिंक भेजें और हां, इस ब्लॉग के लिए अपनी यादों के झरोखों से एकाध कविता भी.

रानी पात्रिक said...

विदेश में बैठे हुए आज मुझे इस कविता को अपनी बच्चों की हिन्दी का कक्षा में सिखाने का मन था। मैं इस कविता की खोज में कम्प्यूटर बैठी और एक ही क्लिक में यह मुझे मिल गयी। धन्यवाद-धन्यवाद!!

rupali said...

hanks for recalling this Poem.
I also used to recall this wnenever it is raining.

rupali said...

hanks for recalling this Poem.
I also used to recall this wnenever it is raining.