यह कविता भी प्रतिमा की यादों से. आप भी अपनी यादों के झरोखे से एकाध कवितायें लाइये, ताकि आज के बच्चे उनका स्वाद ले सकें. भेजें- gonujha.jha@gmail.com पर
इस कविता के लिए प्रतिमा कहती हैं- "याद है मुझे , छुटपन में डुगडुगी बजाता , बच्चों को बुलाता वो मदारी जिसके पास हीरो-हीरोइन जैसे दो बन्दर होते थे, मतलब वो ऐसा कहता था. चश्मा लगाये बन्दर और घाघरा पहने बन्दरिया .. आहा कित्ती प्यारी... मदारी की डुगडुगी पर हम बच्चों का घर से निकलना वैसे ही तय होता था , जैसे पैड्पाइपर के पाइप बजाने पर चूहों का निकलना, फिर चाहे सर्दी हो, बारिश हो , या हो चिलचिलाती धूप का मौसम....! ऐसे में इस कविता का हमें झटपट याद हो जाना कतई आश्चर्य का विषय नही कहा जा सकता..., बचपन बीत गया, मदारी भी कहीं गुम गये, मगर यादों में ये कविता रह गयी....
डम-डम,डम-डम करता आया,
बन्दर वाला , बन्दर लाया,
बन्दर के संग एक बन्दरिया,
पहने थी वो लाल घघरिया,
ठुमुक-ठुमुक कर नाच दिखाती,
माँग-माँग कर पैसे लाती !
This blog is "Poetry meant for Children" so that children of all age group can pick up their favorite from here. You may also participate. Send poems, written or heard by you on gonujha.jha@gmail.com. poems will be published with your name.
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गुरुवार, 3 जून 2010
बुधवार, 4 जून 2008
मेरी गुडिया पडी बीमार
डॉक्टर पर एक और कविता- गीत । बचपन में हमारे स्कूल में होनेवाले साप्ताहिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यह गीत एक अंतराल पर अनिवार्य रूप से आ जाता था। आज अपने थिएटर वर्क्शौप में जब बच्चे इसे प्रस्तुत करते हैं तो dekhanevaale मुस्काए बिना नहीं रह पाते। आप भी इसका आनंद लें।)
डॉक्टर देखो bhalii प्रकार
मेरी गुडिया पडी बीमार
आया, बरसा, छम-छम पानी
उसमें भीगी हदिया रानी
गीली कपडे दिए उतार
फ़िर भी गुडिया पडी बीमार
ओहो, इसको तेज बुखार
सौ से ऊपर डिग्री चार
दवा की है ये चार खुराक
सुबह-दोपहर-शाम और रात
फीस लगेगी हर इक बार
आज नगद और कल हो उधार
फीस?
जबतक गुडिया रहे बीमार
tab तक पैसा रहे उधार।
डॉक्टर देखो bhalii प्रकार
मेरी गुडिया पडी बीमार
आया, बरसा, छम-छम पानी
उसमें भीगी हदिया रानी
गीली कपडे दिए उतार
फ़िर भी गुडिया पडी बीमार
ओहो, इसको तेज बुखार
सौ से ऊपर डिग्री चार
दवा की है ये चार खुराक
सुबह-दोपहर-शाम और रात
फीस लगेगी हर इक बार
आज नगद और कल हो उधार
फीस?
जबतक गुडिया रहे बीमार
tab तक पैसा रहे उधार।
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