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सोमवार, 22 अक्टूबर 2007

शेर की ससुराल यात्रा


नाई की दुकान पे जा कर
बोला राजा शेर
बढिया शेव बनाओ भाई
करो न ज़्यादा देर
मालिश कर के क्रीम लगाओ
चिकने कर दो गाल
बीबी को लाने कल मुझको
जाना है ससुराल #

रविवार, 21 अक्टूबर 2007

चिडिया और बन्दर





बैठा था एक दाल पर बन्दर
भीग रहा पानी के अन्दर
थर थर, थर थर काँप रहा था
कहाँ छिपू, यह झाँक रहा था
चिडिया बोली, बन्दर मामा,
कहा नही तुमने क्यो माना
बना नही घर, भीग रहे हो,
आक छी, आक छी, छींक रहे हो।
सुन मामा को गुस्सा आया
चिडिया का घर तोड़ गिराया
चू- चू, चू- चू चिडिया रोई
बैठ दाल पर फिर वो सोई



गुरुवार, 18 अक्टूबर 2007

कोयल और कव्वा

छुटपन मी मा के गले लगकर, उनकी पीठ पर झूल झूल कर यह कविता गाती थी। छोटी सी, पर मनभावन

कोयल काली होती है
कव्वा काला होता है
कोयल करती कू -कू
कव्वा करता कांव -कांव
आओ -आओ कोयल रानी
कव्वा भाई जा -जा
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